डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में छात्रा को एक टीचर ने बनाया बंधक

जिस सपने को लेकर देश के महान शिक्षाविद डॉ. हरिसिंह गौर ने एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की नींव रखी थी, शायद उन्होंने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उसी ज्ञान की धरती पर एक दिन शिक्षा का इतना भयावह चेहरा सामने आएगा।सागर स्थित डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। जहां शिक्षा देने वाला एक शिक्षक ही मानवता की सारी सीमाएं लांघ गया। आरोप है कि विभाग के एक शिक्षक ने एक छात्रा को दो घंटे तक अपने कमरे में बंद कर बंधक बनाकर रखा।

छात्रा को छुड़ाने जब विभाग के अन्य शिक्षक पहुंचे, तब जाकर दरवाजा खोला गया। अंदर का नज़ारा देखकर सब स्तब्ध रह गए — छात्रा फूट-फूट कर रो रही थी, मानसिक रूप से बुरी तरह टूट चुकी थी। तत्काल उसे विश्वविद्यालय के अस्पताल ले जाया गया।

इस पूरे मामले में छात्राओ ने आरोप लगाया है कि उनकी गाइड और असिस्टेंट प्रोफेसर प्रीति बाधवानी उन्हें जबरन विभागाध्यक्ष और प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर के खिलाफ शिकायत लिखने को कह रहीं थीं। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने दो घंटे तक कमरे में बैठाकर रखा और दूसरे शिक्षको के हस्तक्षेप के बाद उसे छोड़ दिया। मामले की शिकायत विभागाध्यक्ष ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की है, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात की है।

दरअसल एक दिन पहले दो छात्राओं ने अपने गाइड प्रीति बड़वानी को बदलने का आवेदन एच ओ डी को दिया था।,इसकी जांच के लिए कमेटी बनाई गई और कमेटी
के सामने दोनों छात्राओं को बयान देने और कारण पूछने बुलाया था, लेकिन करीब दो घंटे तक जब एक छात्रा उनके पास नहीं आई तो उन्होंने फैकल्टी को इसका कारण पता लगाने के लिए भेजा, जिसमें सामने आया कि दो घंटे से छात्रा असिस्टेंट प्रोफेसर प्रीति बाधवानी के पास बैठी है और रो रही थी।पीड़ित छात्रा से जब इस बारे में पूछा गया तब उसने जो बात बताई जिससे जाहिर होता है कि छात्राएं अपने गाइड से किस कदर पीड़ित थी इस  आरोप पर प्रीति बाधवानी ने इसे षडयंत्र कहा और किसी भी तरह की बंधक बनाने वाली बात से इनकार किया है

एच ओ डी अनिल जैन ने कहा कि दोनों छात्राओं ने एक दिन पहले गाइड बदलने के लिए आवेदन किया था। जिसके लिए आज कमेटी के समक्ष छात्रों को अपना पक्ष रखना था। करीब दो घंटे तक उसे जबरन मेरे खिलाफ आवेदन लिखवाया गया। जबकि छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री है। जैसे ही हमें इस बात का पता चला हमने त्काल छात्रा को कमरे से निकाल कर मेडिकल के लिए भेजा और मामले की शिकायत रजिस्ट्रार से की है।

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