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October 20, 2026
SAGAR EXPRESS NEWS
एडिटर स्पेशल

सागर कलेक्टर रहे संदीप जी आर का कार्यकाल खत्म: काम से ज्यादा विवादों में रहा कार्यकाल

सागर। संदीप जी आर का कलेक्टर के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन उनके कार्यकाल से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जो चर्चा और सवाल दोनों छोड़ गए हैं।


प्रशासनिक स्तर पर जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, वहीं उनके कार्यकाल में कुछ ऐसे विवाद भी सामने आए, जिन्होंने लगातार सुर्खियां बटोरीं। सबसे अधिक चर्चा उनके सरकारी बंगले में कराए गए कार्यों को लेकर रही। आरोप लगे कि बंगले में करोड़ों रुपये के निर्माण और साज-सज्जा पर खर्च किया गया, जिससे आम लोगों के बीच यह सवाल उठा कि सीमित समय के कार्यकाल में इस तरह का खर्च कितना उचित था।

बंगले और कार्यालय के गेटों की दिशा बदलवाने का मामला भी खासा चर्चा में रहा। इस निर्णय को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं। आलोचकों ने इसे फिजूलखर्ची और सरकारी संसाधनों के अनावश्यक उपयोग के रूप में देखा। पहले एक गेट को बंद कर चारों दिशाओं में नए गेट बनाए गए, लेकिन बाद में अधिकांश गेट बंद कर केवल एक ही गेट चालू रखा गया। इससे यह सवाल उठता रहा कि यदि अंततः एक ही गेट उपयोग में लाना था, तो बाकी निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी—जिसे समय और धन की बर्बादी के रूप में देखा गया।
इसी तरह नए कलेक्टर कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर साइड में नया गेट बनवाने का निर्णय भी चर्चा का विषय बना। कई लोगों ने इसे वास्तु के आधार पर लिया गया फैसला बताया, जिसने प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर बहस को और हवा दी।

इन मुद्दों को लेकर एक ठेकेदार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बंगले में कराए गए कार्यों के भुगतान को लेकर आरोप भी लगाए गए। ठेकेदार का कहना था कि किए गए काम का भुगतान रोका गया है, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चित हुआ और कलेक्टर की छवि पर भी असर पड़ा।
उनके कार्यकाल का एक चिंताजनक पहलू जनसुनवाई से जुड़ा रहा। कई मौकों पर समस्याओं से परेशान लोगों द्वारा आत्मदाह की कोशिशें किए जाने की घटनाएं सामने आईं, जिसने प्रशासन की संवेदनशीलता और शिकायतों के निराकरण की गति पर सवाल खड़े किए।

एक ओर जहां बड़े स्तर पर निर्णय और कार्य दिखाई दिए, वहीं दूसरी ओर आम जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान में अपेक्षित तेजी नहीं दिखने की शिकायतें भी सामने आईं। उनके कार्यकाल में कुछ ऐसे फैसले भी चर्चा में रहे—जैसे कलेक्ट्रेट परिसर में हेलमेट अनिवार्य करना और जिस गेट से कलेक्टर कार्यालय जाते थे, उसे आम लोगों के लिए बंद करना—जिन्हें लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

कुल मिलाकर, जाते जाते अपने बंगले से सात ट्रकों में सामान भरकर ले जाने वाले संदीप जी आर का कार्यकाल उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों और सवालों के लिए भी याद किया जाएगा—जहां प्रशासनिक निर्णयों के साथ पारदर्शिता, प्राथमिकता और संवेदनशीलता पर लगातार बहस जारी रही।

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