अनोखा मामला: ASP के फर्जी हस्ताक्षर करने वाले ASI की नौकरी तो बची, लेकिन छिन गए ‘सितारे’
बर्खास्तगी के बाद IG ने दी राहत, लेकिन पद घटाकर बनाया कांस्टेबल

सागर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सागर जिले से पुलिस महकमे का एक बेहद ही दिलचस्प और कड़ा संदेश देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) को अपने वरिष्ठ अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करना इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी वर्दी के ‘सितारे’ गवाने पड़े। बर्खास्तगी की कगार से लौटकर आए इस अधिकारी को अब अपने ही पूर्व मातहतों के साथ आरक्षक (कांस्टेबल) बनकर ड्यूटी करनी होगी।
क्या है पूरा मामला? (लापरवाही छिपाने के लिए की जालसाजी)
यह मामला सागर जिले की बहरोल थाने की सेसई चौकी का है। तत्कालीन चौकी प्रभारी एएसआई रामजी सिंह राजपूत एक मर्ग (मृत्यु मामले की जांच) का ड्राफ्ट तैयार कर रहे थे। जांच प्रक्रिया में हुई देरी या लापरवाही को छिपाने के लिए उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठा लिया। ASI राजपूत ने मर्ग जांच संबंधी सामग्री और ड्राफ्ट पर एडिशनल एसपी (ASP) डॉ. संजीव उईके के फर्जी हस्ताक्षर खुद ही कर दिए। नियमतः इस फाइल को एएसपी के अवलोकन के बाद ही आगे बढ़ना था, लेकिन राजपूत ने सीधे इसे FSL (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) भेज दिया।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?
जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब एफएसएल अधिकारी को ड्राफ्ट पर किए गए एडिशनल एसपी के हस्ताक्षरों पर संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी पुष्टि के लिए एएसपी डॉ. संजीव उईके से संपर्क किया। जब एएसपी ने फाइल वापस मंगवाकर देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई; उनके पद का उपयोग कर किसी और ने हस्ताक्षर किए थे।
विभागीय कार्रवाई की टाइमलाइन:
जांच: एएसपी की शिकायत पर मामले की विभागीय जांच (DE) बिठाई गई।
बर्खास्तगी: जांच में दोषी पाए जाने पर DIG शशींद्र चौहान ने करीब 2 माह पहले एएसआई राजपूत की सेवा समाप्ति (Dismissal) के आदेश जारी कर दिए थे।
IG की कोर्ट में अपील: बर्खास्तगी से बहाली, पर पद में ‘डिमोशन’
नौकरी जाने के बाद रामजी सिंह राजपूत ने आईजी हिमानी खन्ना के समक्ष अपील दायर की। आईजी ने मामले की गंभीरता और मानवीय पहलुओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया। उन्होंने बर्खास्तगी के आदेश को तो रद्द कर दिया, लेकिन अनुशासनहीनता के लिए एक कड़ी सजा मुकर्रर की।
> फर्जी हस्ताक्षर मामले में ASI रामजी सिंह को DIG साहब द्वारा बर्खास्त किया गया था, आईजी सागर ने राजपूत को सेवा में बहाल तो कर दिया, लेकिन उन्हें ASI के पद से डिमोट (पदावनत) कर आरक्षक (Constable) बना दिया गया है। – विकास सहवाल (पुलिस अधीक्षक सागर)
अब 2 साल तक करनी होगी आरक्षक की नौकरी
इस आदेश के बाद अब रामजी सिंह राजपूत के कंधे से सितारे छिन गए हैं। जानकारी के अनुसार, उन्हें अगले 2 साल तक आरक्षक के पद पर ही कार्य करना होगा। यह पुलिस विभाग में अपने आप में एक अलग तरह की सजा है, जहाँ बरसों तक दूसरों पर हुक्म चलाने वाला अधिकारी अब उन्हीं के बराबर खड़े होकर ड्यूटी करेगा।
निष्कर्ष: विभाग में अनुशासन का कड़ा संदेश
सागर का यह मामला पुलिस महकमे के उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो कागजी कार्रवाई में शॉर्टकट अपनाते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करना न केवल अनैतिक है बल्कि एक गंभीर अपराध भी है। हालांकि आईजी के फैसले से राजपूत की रोजी-रोटी बच गई है, लेकिन विभाग में उनका रसूख पूरी तरह खत्म हो गया है।
